औरैया। जनपद की गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर से वर्मी कंपोस्ट (जैविक खाद) और अन्य जैविक उत्पाद तैयार करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इससे गौशालाओं की आय बढ़ेगी और किसानों को रासायनिक खाद का बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।
रविवार को खानपुर स्थित गौ आश्रय स्थल के निरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के सदस्य राजेश सिंह सेंगर ने कहा कि गौशालाओं में संरक्षित गोवंश अब आय का माध्यम भी बनेंगे। गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए पिट बनाए जा रहे हैं। किसान चारे के बदले जैविक खाद प्राप्त कर सकेंगे और अतिरिक्त खाद की बिक्री से गौशालाओं की आमदनी बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद के अधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घट रही है, जबकि वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की पोषक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। सरकार किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चला रही है।
उन्होंने बताया कि जनपद की गौशालाओं में वर्मी कंपोस्ट के साथ जीवामृत, गोकाष्ट, गोबर से धूपबत्ती, धूप, दीपक और मूर्तियां बनाने की भी तैयारी की जा रही है। इसके लिए गौशाला कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
रजुआमऊ गौशाला में गोवंश की मौत के मामले पर उन्होंने कहा कि प्रशासन से मिली रिपोर्ट में केवल एक गोवंश की मृत्यु की पुष्टि हुई है। उन्होंने अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही जैविक खाद पर सब्सिडी देने की योजना लागू करेगी। किसानों से अपील की गई कि वे अपने क्षेत्र की गौशालाओं से संपर्क कर जैविक खाद का अधिक से अधिक उपयोग करें।
इस दौरान गौशाला संचालक संतोष गुप्ता, विवेक पाल, उत्कर्ष शुक्ला, बृजेश बन्धु, विशाल, हर्षित सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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